शिक्षक ही होता है बच्चे का मार्गदर्शक, करता है बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की दिशा को तय--शिक्षक पूरी लगन और समर्पण के साथ बच्चों को दें शिक्षा, तो निश्चित रूप से समाज और देश का होगा भविष्य मजबूत: एडीसी प्रदीप कुमार

निपुण जींद कार्यक्रम के तहत एडीसी प्रदीप कुमार ने ली शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक, दिए आवश्यक दिशा- निर्देश

शिक्षक ही होता है बच्चे का मार्गदर्शक, करता है बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की दिशा को तय--शिक्षक पूरी लगन और समर्पण के साथ बच्चों को दें शिक्षा, तो निश्चित रूप से समाज और देश का होगा भविष्य मजबूत: एडीसी प्रदीप कुमार


- निपुण जींद कार्यक्रम के तहत एडीसी प्रदीप कुमार ने ली शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक, दिए आवश्यक दिशा- निर्देश
 जींद, 10 मार्च।    
लघु सचिवालय स्थित एडीसी कॉन्फ्रेंस हॉल में मंगलवार को निपुण जींद कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता एडीसी प्रदीप कुमार ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की भाषा और गणना की समझ को मजबूत करना था। एडीसी ने कहा कि शिक्षक ही वह मार्गदर्शक होता है जो बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की दिशा तय करता है। यदि शिक्षक पूरी लगन और समर्पण के साथ बच्चों को शिक्षा देंगे, तो निश्चित रूप से समाज और देश का भविष्य भी मजबूत होगा। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी रितु, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कल्याणी, जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ तथा विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों के संचालक और शिक्षक मौजूद रहे।
बैठक के दौरान एडीसी प्रदीप कुमार ने उन प्राथमिक विद्यालयों के संचालकों और शिक्षकों से विशेष रूप से चर्चा की, जिनका शैक्षणिक परिणाम अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि बच्चों को भाषा और गणना की बुनियादी समझ मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही बच्चों को स्वर और व्यंजनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए, ताकि उनकी पढ़ने और समझने की क्षमता में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाने के लिए पारंपरिक तरीके के साथ-साथ प्राकृतिक और सरल शिक्षण पद्धति अपनानी चाहिए। यदि बच्चों को खेल-खेल में और रोचक तरीके से पढ़ाया जाए तो वे पढ़ाई में अधिक रुचि लेते हैं और विषयों को आसानी से समझ पाते हैं। उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार रखें, ताकि बच्चे बिना डर के अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कर सकें और सीखने का माहौल सकारात्मक बने।
एडीसी ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के भविष्य की मजबूत नींव होती है। यदि इस स्तर पर बच्चों को सही मार्गदर्शन और अच्छी शिक्षा मिले, तो उनका बौद्धिक और सामाजिक विकास बेहतर तरीके से हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यालय संचालकों और शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास करें। इसके लिए अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बारे में जागरूक किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूलों में बच्चों को बेहतर वातावरण, साफ-सफाई और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हों।

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