विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत व पहला कदम फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से किया जागरूकता कार्यक्रम
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए जागरूक बने :- राजेश वशिष्ठ
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत व पहला कदम फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से किया आयोजन

साइबर फ्रॉड से बचने के लिए जागरूक बने :- राजेश वशिष्ठ
जींद। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत और पहला कदम फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संगठन के स्थानीय कार्यालय में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी देना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला अध्यक्ष राजेश वशिष्ठ ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के डिजिटल युग में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता भी इसका अहम हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अब केवल बाजार में वस्तुएं खरीदने वाला व्यक्ति नहीं रहा, बल्कि वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय है, जहां उसकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी लगातार जोखिम में रहती है। राजेश वशिष्ठ ने उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि हाल के दिनों में एक नई और खतरनाक साइबर ठगी की तकनीक सामने आई है, जिसे ‘कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम’ कहा जाता है। यह स्कैम मोबाइल फोन, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और व्यक्तिगत पहचान से सीधे जुड़ा हुआ है। साइबर अपराधी खुद को किसी नामी कूरियर या डिलीवरी कंपनी का एजेंट बताकर लोगों को कॉल करते हैं। वे पार्सल कन्फर्म करने, डिलीवरी री-शेड्यूल करने या पते की पुष्टि के बहाने भरोसा जीतते हैं और फिर पीड़ित से एक विशेष यू एस एस डी कोड (जैसे *21, *61, *67 या *401 से शुरू होने वाले) डायल करवाते हैं।
जैसे ही व्यक्ति यह कोड डायल करता है, उसके मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग अपने आप एक्टिव हो जाती है। इसके बाद बैंक से आने वाले ओ टी पी , ट्रांजेक्शन अलर्ट और सोशल मीडिया वेरिफिकेशन कॉल सीधे ठगों के नंबर पर पहुंचने लगते हैं। इस तरह ठग बिना किसी तकनीकी बाधा के पीड़ित के बैंक खाते, यू पी आई , व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना लेते हैं।उन्होंने बताया कि कई मामलों में पीड़ित को तब तक ठगी का पता नहीं चलता जब तक उसके खाते से बड़ी रकम नहीं निकल जाती या सोशल मीडिया अकाउंट हैक नहीं हो जाता। यह स्कैम न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि व्यक्ति की डिजिटल पहचान को भी गंभीर खतरे में डाल देता है। राजेश वशिष्ठ ने कहा कि इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉलर पर भरोसा न करें, कूरियर या डिलीवरी के नाम पर कोई भी कोड डायल न करें, और किसी भी परिस्थिति में ओ टी पी या बैंक से जुड़ी जानकारी किसी से साझा न करें। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी वास्तविक कंपनी कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव करने को नहीं कहती, इसलिए ऐसे किसी भी अनुरोध को तुरंत अस्वीकार कर देना चाहिए।
उन्होंने उपस्थित लोगों को यह भी बताया कि यदि किसी को कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम का संदेह हो या वह इसका शिकार हो जाए, तो तुरंत ##002# डायल कर सभी प्रकार की कॉल फॉरवर्डिंग सेवाएं बंद करें। इसके बाद अपने बैंक को सूचित करें और अपने परिजनों को जानकारी दें ताकि उनके नाम पर कोई और ठगी न हो सके। कार्यक्रम में उपस्थित एडवोकेट नरेंद्र अत्री व एडवोकेट मनोज शर्मा ने भी उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत उपभोक्ताओं को कई अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें सुरक्षित उत्पाद प्राप्त करने का अधिकार, जानकारी प्राप्त करने का अधिकार, शिकायत दर्ज कराने का अधिकार और मुआवजा पाने का अधिकार शामिल हैं।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित युवाओं ने साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने बताया कि आने वाले समय में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर अपराधों से बचाव के उपाय सीख सकें।राजेश वशिष्ठ ने अंत में कहा कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की शिकायत तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या cybercrime.gov.in पर दर्ज कराई जा सकती है। समय पर की गई शिकायत से आर्थिक नुकसान को रोका जा सकता है और अपराधियों को पकड़ने में भी मदद मिलती है।इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पहला कदम फाउंडेशन की टीम ने किया और अंत में सभी प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी पुस्तिका वितरित की गई।
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